उज्जैन महाकाल मंदिर का एक खास इतिहास बता रहा हूँ Ujjain Mahadev Mandir history in Hindi

महाकाल मंदिर का एक खास इतिहास बता रहा हूँ

Jun 12, 2023 - 19:07
Jul 25, 2023 - 11:08
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उज्जैन महाकाल मंदिर का एक खास इतिहास बता रहा हूँ  Ujjain Mahadev Mandir history in Hindi

उज्जैन महाकाल मंदिर

हर हर महादेव

*महाकाल मंदिर का एक खास इतिहास बता रहा हूँ जिसे शायद ही कम लोग जानते है। महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास बहुत कम लोग जानते होंगे, सन 1235 में महाकालेश्वर मंदिर को दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था, महाकाल ज्योतिर्लिंग को आक्रांताओं से सुरक्षित रखने लिए करीब 550 वर्षों तक पास ही के एक कुएं में छुपाया रखा। मराठा शूरवीर श्रीमंत राणोजी राव सिंधिया ने मुगलों को पराजित कर अपना शासन 1732 में उज्जैन में स्थापित किया था। राणोजी महाराज ने श्री बाबा महाकाल ज्योतिर्लिंग को कोटि तीर्थ कुंड से निकाल महाकाल मंदिर का पुनः निर्माण करवाया और महाकाल ज्योतिर्लिंग को मंदिर दोबारा स्थापित किया।*

राणों जी सिंधिया द्वारा बनवाए महाकाल मंदिर का एक पुराना फोटो साझा कर रहा हूं। जय बाबा महाकाल!. इसके अतिरिक्त लगभग 500 वर्षों के अंतराल के बाद, राणोजीराव सिंधिया जी ने 12 वर्षों में एक बार होने वाले उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ उत्सव को भी दोबारा शुरू किया!.

उज्जैन इतिहास

 इतिहास के अनुसार, 1690 में मराठों ने मालवा क्षेत्र के उज्जैन पर आक्रमण किया और मराठा शासकों ने 29 नवंबर 1728 को मालवा क्षेत्र में अपना शासन स्थापित किया। इस प्रकार, उज्जैन मराठा शासकों के शासन के अधीन था।

 

जानिए विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के बारे में ये खास बातें

 उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक। इस शिवलिंग के क्षरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं। जिसके अनुसार, इसमें शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल की मात्रा निर्धारित करना और आरओ द्वारा शुद्ध किया हुआ जल ही चढ़ाना शामिल है। कोर्ट ने कहा है कि श्रद्धालु 500 मिलीलीटर से ज्यादा जल नहीं चढ़ा सकते. इतना ही नहीं, भस्म आरती के दौरान शिवलिंग को सूखे सूती कपड़े से ढका जाएगा।

 

 शिवलिंग पर चीनी पाउडर की जगह दानेदार चीनी लगाई जाएगी और शिवलिंग के ऊपरी हिस्से पर बिलिपत्र और फूलपान चढ़ाया जाएगा. इससे पत्थर की प्राकृतिक सांस लेने में बाधा नहीं आएगी और ड्रायर का उपयोग किया जाएगा और शाम 5 बजे के बाद सुकी पूजा की जाएगी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में कंडे की भस्म चढ़ाई जाती है, जिससे शिवलिंग का क्षय हो रहा है। तब जाकर कोर्ट ने ये आदेश दिया है. आज हम आपको इस मंदिर और इसके महात्म्य के बारे में कुछ खास बातें बताएंगे।

 

 

महाकालेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण

 मराठा शासनकाल के दौरान यहां दो महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं। प्रथम महाकालेश्वर मन्दिर का पुनर्निर्माण एवं ज्योतिर्लिंग की पुनर्स्थापना एवं सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना। जो एक बड़ी उपलब्धि थी. बाद में चाली राजा भोज ने इस मंदिर का विस्तार किया।

 

आपको बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। महाकालेश्वर प्राकृतिक रूप से भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महादेव के लिए अत्यंत शुभ है। ऐसा माना जाता है कि इनके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है। 235 ई. तक इस प्राचीन मंदिर के ध्वस्त हो जाने के बाद जो शासक वहां रुके, उन्होंने इस मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया।

 

उज्जैन महाकाल की आरती

 आपको बता दें कि मंदिर के पास एक छोटे से जल स्रोत को कोटितीर्थ कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि अल्तुतमिश ने जब मंदिर को ध्वस्त किया था तो उसने शिवलिंग को इसी कोटितीर्थ में फेंक दिया था। फिर उनका अंतिम संस्कार किया गया. इसलिए इस मंदिर का बहुत महत्व है। यहां श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है लेकिन कुंभ के दौरान यहां भीड़ काफी बढ़ जाती है। महाकाल की आरती देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं।

 

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यह इतिहास इंटरनेट सर्फिंग और लोककथाओं के आधार पर लिखी गई है, हो सकता है कि यह पोस्ट 100% सटीक न हो। जिसमें किसी जाति या धर्म या जाति का विरोध नहीं किया गया है। इसका विशेष ध्यान रखें।

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